रात तठनह॒ं होत॒ गठअंधेरà¤

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रात तठनह॒ं होत॒ गठअंधेरा आ गाता है,
रात तठहोत॒ है गठउग़ाला चला गाता है……
à¤à¤¾à¤¤ à¤à¤¹à¥à¤¤ मामूल॒ है…..इसिलिये तो खास है…..!
अर्अ तठनह॒ं होता गठकोई भुला अेता है,
अर्अ तठहोता है गठवो याअ à¤à¤¹à¥à¤¤ आता है……..
à¤à¤¾à¤¤ à¤à¤¹à¥à¤¤ मामूल॒ है…..इसिलिये तो खास है…..!
मैं तठनह॒ं थकता गठà¤à¤¹à¥à¤¤ चल लेता हूँ,
मैं à¤à¤¹à¥à¤¤ थक गाता हूँ गठखुअ को अकेला पाता हूँ…
à¤à¤¾à¤¤ à¤à¤¹à¥à¤¤ मामूल॒ है…..इसिलिये तो खास है…..!
ग़ुल्म तठनह॒ं à¤à¤-़ता गठलोग à¤à¥à¤°à¥‡ हो गाते हैं,
ग़ुल्म तठà¤à¤-़ गाता है गठअच्छे लोग सो गाते हैं….
à¤à¤¾à¤¤ à¤à¤¹à¥à¤¤ मामूल॒ है…..इसिलिये तो खास है…..!